बाल कृष्ण लीला की कथा श्रवण कर आनंद विभोर हुए श्रोता
बांसी नगर स्थित श्री ठाकुर राम जानकी मंदिर पर चल रहे पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस की रात्रिकालीन कथा के अंतर्गत आचार्य हरिवेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि भगवान अपनी लीलाओं से ब्रजवासियों को आनंद प्रदान करते हुए एक दिन गेंद के बहाने यमुना के काली दह में कूद पड़े क्योंकि कालिया नाग वहां के यमुना जल को अपने विष से विषैला कर रहा था कालिया नाग ने पहले तो भगवान के शरीर को जकड़ लिया फिर भगवान उस के बंधन से मुक्त होकर उसके फन पर खड़े होकर नृत्य करने लगे भगवान के उस अद्भुत नृत्य से उसके 108 फन रक्त रंजित हो गए तब नाग पत्नियों ने भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति की भगवान श्री कृष्ण नृत्य करना बंद किए नाग पत्नियों ने कहा हे प्रभु आपके जिस चरण को स्वयं भोलेनाथ नहीं प्राप्त कर पाए उनको केवल आपकी चरणरज गंगा ही प्राप्त हो पाई आपके दोनों चरणों को दानवीर बलि तीनो लोक दे कर के नहीं पाया उसे केवल एक ही चरण प्राप्त हुआ हे गोविंद यहां पर मेरे पति ने ना तो आपका पूजन किया ना ही कोई दान किया फिर भी आपने कृपा करके मेरे पति को अपना दोनों चरण प्रदान किए भगवान आप बहुत ही दयालु हैं भगवान श्री कृष्ण नाग पत्नियों के इन वचनों से प्रसन्न हो गए । और कालिया नाग को छोड़ दिए कालिया नाग ने दोबारा फुफकार मारा भगवान श्री कृष्ण ने नाग पत्नियों से कहा देखो अभी तुम्हारे पति की दुष्टता दूर नहीं हुई काली नाग ने कहा प्रभु आप ही सब कहेंगे याआप मुझे भी बोलने का अवसर देंगे भगवान ने कहा बोलो तब कालिया नाग ने कहा प्रभु यह बताएं दुनिया को किसने बनाया भगवान ने कहा हमने काली नाग ने कहा हम नागो को किसने बनाया भगवान ने कहा हमने काली नाग ने कहा हम नागों में विष किसने डाला भगवान ने कहा हमने तो उसने कहा हे प्रभु तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा आपने हमें जब विष दिया है तो हम विष ही उगलेंगे ना भगवान ने कहा अगर हमने नागों को विषैला बनाया तो रहने के लिए रमणक द्वीप बना दिया है वहां क्यों नहीं जाते रहते। यहां भारत में आकर क्यों विष उगल रहे हो। कालिया नाग ने कहा कि वहां आप का वाहन गरुड़ मुझे चैन से नहीं रहने देता। और रही बात विष उगलने की तो यह तो मेरा स्वभाव है।
आचार्य ने स्पष्ट किया कि आज ठीक यही स्थिति भारत की है विषउगलने वालों के लिए अलग देश बनाया गया लेकिन कुछ अपने ही लोग उन्हें उकसा के भारत में लाकर विष उगलवा रहे हैं और देश को बर्बाद कर रहे हैं। अगर ऐसे उकसाने वाले लोगों को नियंत्रित किया जाए तो विष उगलने वाले भारत में ना आने पाएंगे ना रहने पाएंगे और भारतवर्ष में हर क्षण चयन की ही बंसी बजेगी।
उक्त श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का सफल आयोजन एवं व्यवस्था बांसी नगर के वरिष्ठ नागरिक सेवानिवृत्त शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री माधव धर द्विवेदी एवं राममिलन पांडे तथा उनके सहयोगी यों के द्वारा बड़े ही सुंदर ढंग से की जा रही है। श्री ठाकुर राम जानकी मंदिर के महंत श्री हनुमान दास नागा श्रोता भक्तों की संख्या को देखकर गदगद कंठ से लोगों के प्रति आभार ज्ञापित किए।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक जी ने किया जिसमें विशेष सहयोगी सभासद अजय शुक्ला राजेश सोनी डॉ बी एन त्रिपाठी बृज बिहारी शुक्ला ओम प्रकाश पांडे सुरेंद्र श्रीवास्तव अजय मिश्र गुरुचरण मौर्य पप्पू यादव नीरज गिरी प्रदीप मोदनवाल ज्योति यादव विभोर पांडे मनोज बाबा भार्गव मेडिकल स्टोर मुन्ना सिंह ऋषि श्रीवास्तव पप्पू मिश्रा शत्रुघ्न पांडे आदि उपस्थित रहे।
बांसी नगर स्थित श्री ठाकुर राम जानकी मंदिर पर चल रहे पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस की रात्रिकालीन कथा के अंतर्गत आचार्य हरिवेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि भगवान अपनी लीलाओं से ब्रजवासियों को आनंद प्रदान करते हुए एक दिन गेंद के बहाने यमुना के काली दह में कूद पड़े क्योंकि कालिया नाग वहां के यमुना जल को अपने विष से विषैला कर रहा था कालिया नाग ने पहले तो भगवान के शरीर को जकड़ लिया फिर भगवान उस के बंधन से मुक्त होकर उसके फन पर खड़े होकर नृत्य करने लगे भगवान के उस अद्भुत नृत्य से उसके 108 फन रक्त रंजित हो गए तब नाग पत्नियों ने भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति की भगवान श्री कृष्ण नृत्य करना बंद किए नाग पत्नियों ने कहा हे प्रभु आपके जिस चरण को स्वयं भोलेनाथ नहीं प्राप्त कर पाए उनको केवल आपकी चरणरज गंगा ही प्राप्त हो पाई आपके दोनों चरणों को दानवीर बलि तीनो लोक दे कर के नहीं पाया उसे केवल एक ही चरण प्राप्त हुआ हे गोविंद यहां पर मेरे पति ने ना तो आपका पूजन किया ना ही कोई दान किया फिर भी आपने कृपा करके मेरे पति को अपना दोनों चरण प्रदान किए भगवान आप बहुत ही दयालु हैं भगवान श्री कृष्ण नाग पत्नियों के इन वचनों से प्रसन्न हो गए । और कालिया नाग को छोड़ दिए कालिया नाग ने दोबारा फुफकार मारा भगवान श्री कृष्ण ने नाग पत्नियों से कहा देखो अभी तुम्हारे पति की दुष्टता दूर नहीं हुई काली नाग ने कहा प्रभु आप ही सब कहेंगे याआप मुझे भी बोलने का अवसर देंगे भगवान ने कहा बोलो तब कालिया नाग ने कहा प्रभु यह बताएं दुनिया को किसने बनाया भगवान ने कहा हमने काली नाग ने कहा हम नागो को किसने बनाया भगवान ने कहा हमने काली नाग ने कहा हम नागों में विष किसने डाला भगवान ने कहा हमने तो उसने कहा हे प्रभु तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा आपने हमें जब विष दिया है तो हम विष ही उगलेंगे ना भगवान ने कहा अगर हमने नागों को विषैला बनाया तो रहने के लिए रमणक द्वीप बना दिया है वहां क्यों नहीं जाते रहते। यहां भारत में आकर क्यों विष उगल रहे हो। कालिया नाग ने कहा कि वहां आप का वाहन गरुड़ मुझे चैन से नहीं रहने देता। और रही बात विष उगलने की तो यह तो मेरा स्वभाव है।
आचार्य ने स्पष्ट किया कि आज ठीक यही स्थिति भारत की है विषउगलने वालों के लिए अलग देश बनाया गया लेकिन कुछ अपने ही लोग उन्हें उकसा के भारत में लाकर विष उगलवा रहे हैं और देश को बर्बाद कर रहे हैं। अगर ऐसे उकसाने वाले लोगों को नियंत्रित किया जाए तो विष उगलने वाले भारत में ना आने पाएंगे ना रहने पाएंगे और भारतवर्ष में हर क्षण चयन की ही बंसी बजेगी।
उक्त श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का सफल आयोजन एवं व्यवस्था बांसी नगर के वरिष्ठ नागरिक सेवानिवृत्त शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री माधव धर द्विवेदी एवं राममिलन पांडे तथा उनके सहयोगी यों के द्वारा बड़े ही सुंदर ढंग से की जा रही है। श्री ठाकुर राम जानकी मंदिर के महंत श्री हनुमान दास नागा श्रोता भक्तों की संख्या को देखकर गदगद कंठ से लोगों के प्रति आभार ज्ञापित किए।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक जी ने किया जिसमें विशेष सहयोगी सभासद अजय शुक्ला राजेश सोनी डॉ बी एन त्रिपाठी बृज बिहारी शुक्ला ओम प्रकाश पांडे सुरेंद्र श्रीवास्तव अजय मिश्र गुरुचरण मौर्य पप्पू यादव नीरज गिरी प्रदीप मोदनवाल ज्योति यादव विभोर पांडे मनोज बाबा भार्गव मेडिकल स्टोर मुन्ना सिंह ऋषि श्रीवास्तव पप्पू मिश्रा शत्रुघ्न पांडे आदि उपस्थित रहे।


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