बढ़नी, सिद्धार्थनगर
बढ़नी स्टेशन पर अंतोदय एक्सप्रेस ट्रेन ठहराव की मांग
गोरखपुर -अन्तर्राष्टीय क्षितिज पर स्थित मॉडल रेलवे स्टेशन बढ़नी पर गोरखपुर वाया बढ़नी होते हुए कोटा बांद्रा जाने वाली अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन ठहराव न होने से लाखो के राजस्व की क्षति हो रही है।वही उक्त ट्रेन के ठहराव की मांग बढ़ती जा रही है।
मॉडल रेलवे स्टेशन बढ़नी पर आसनसोल ,हमसफ़र इंटरसिटी ,एलटीटी ,गोमतीनगर एक्सप्रेस ट्रेने रूकती है। बढ़नी रेलवे स्टेशन से प्रतिमाह के इनकम पर यदि गौर किया जाय तो जुलाई 17 में कुल 84843यात्रियों ने जनरल टिकट खऱीदकर यात्रा की जिससे कुल आय 5215990 रूपये हुआ तथा आरक्षण के कुल 2578 यात्रियो ने यात्रा का लाभ उठाया जिससे कुल आय 1412800 रूपये का हुआ। जबकि पता चला है कि जहां अंत्योदय एक्सप्रेस रूकती है उस स्टेशन की उतनी इनकम नही है फिर भी वहां ठहराव होता है आखिर क्यों ?लेकिन साप्ताहिक अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन न रुकने से क्षेत्र के लोगों को मजबूरन नौगढ़ या गोंडा जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें प्राइवेट व डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे क्षेत्र के लोगों को परेशानी का समाना करना पड़ता है वहीं रेलवे राजस्व का भी लाखो का चूना लग रहा है। काफी दिनों से इस स्टेशन पर ट्रेन ठहराव किए जाने की मांग उठ रही है लेकिन कोई सुनवाई होती नहीं दिख रही है। भारत व नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण नेपाल के प्रायः सैकड़ो की संख्या में ट्रेन से अनेक महानगरो की यात्रा करते है ।अंतराष्ट्रीय मार्ग पर स्थित होने के कारण नेपाल बार्डर नजदीक होने की दृष्टि से इस स्टेशन से काफी लोग यात्रा करते हैं। लखनऊ आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या प्रतिदिन डेढ से दो सौ तक हो जाती है।
कस्बे के युवा भाजपा नेता राजकुमार अग्रहरि, सुनील अग्रहरि का कहना है कि जिस तरह से सभी एक्सप्रेस ट्रेन यहा रूकती है उसी तरह अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन का भी ठहराव कराया जाए। जिससे यात्रियों को सहूलियत मिल सके। विद्यार्थी परिसद के विनय सिंह का कहना है की इस क्षेत्र से सैकड़ों लोग पढ़ाई के लिए कोटा आते जाते जाते है ट्रेन के न रुकने से काफी समस्या होती है। इसमें खासकर छात्राएं ज्यादा परेशान होती हैं। शिक्षक उमेश गुप्ता कहना है कि इस क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लोग इसी स्टेशन पर निर्भर हैं। यहां से सूरत ,रतलाम ,कोटा जाने वाली ट्रेन नहीं मिलती। क्षेत्रीय लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। ट्रेन के न रुकने से रुकने से क्षेत्र के व्यवसाय व विकास पर काफी असर पड़ रहा है। बताते चले की सीमावर्ती कस्बा होने के कारण यहा अनेक सुरक्षा एजेंसिया तैनात है जो अलग अलग राज्यो से आते जाते है ।
बहरहाल कस्बे के बुद्धजीवियों का कहना है इससे प्रसाशन अनभिज्ञ नहीं है।
बढ़नी स्टेशन पर अंतोदय एक्सप्रेस ट्रेन ठहराव की मांग
गोरखपुर -अन्तर्राष्टीय क्षितिज पर स्थित मॉडल रेलवे स्टेशन बढ़नी पर गोरखपुर वाया बढ़नी होते हुए कोटा बांद्रा जाने वाली अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन ठहराव न होने से लाखो के राजस्व की क्षति हो रही है।वही उक्त ट्रेन के ठहराव की मांग बढ़ती जा रही है।
मॉडल रेलवे स्टेशन बढ़नी पर आसनसोल ,हमसफ़र इंटरसिटी ,एलटीटी ,गोमतीनगर एक्सप्रेस ट्रेने रूकती है। बढ़नी रेलवे स्टेशन से प्रतिमाह के इनकम पर यदि गौर किया जाय तो जुलाई 17 में कुल 84843यात्रियों ने जनरल टिकट खऱीदकर यात्रा की जिससे कुल आय 5215990 रूपये हुआ तथा आरक्षण के कुल 2578 यात्रियो ने यात्रा का लाभ उठाया जिससे कुल आय 1412800 रूपये का हुआ। जबकि पता चला है कि जहां अंत्योदय एक्सप्रेस रूकती है उस स्टेशन की उतनी इनकम नही है फिर भी वहां ठहराव होता है आखिर क्यों ?लेकिन साप्ताहिक अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन न रुकने से क्षेत्र के लोगों को मजबूरन नौगढ़ या गोंडा जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें प्राइवेट व डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे क्षेत्र के लोगों को परेशानी का समाना करना पड़ता है वहीं रेलवे राजस्व का भी लाखो का चूना लग रहा है। काफी दिनों से इस स्टेशन पर ट्रेन ठहराव किए जाने की मांग उठ रही है लेकिन कोई सुनवाई होती नहीं दिख रही है। भारत व नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण नेपाल के प्रायः सैकड़ो की संख्या में ट्रेन से अनेक महानगरो की यात्रा करते है ।अंतराष्ट्रीय मार्ग पर स्थित होने के कारण नेपाल बार्डर नजदीक होने की दृष्टि से इस स्टेशन से काफी लोग यात्रा करते हैं। लखनऊ आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या प्रतिदिन डेढ से दो सौ तक हो जाती है।
कस्बे के युवा भाजपा नेता राजकुमार अग्रहरि, सुनील अग्रहरि का कहना है कि जिस तरह से सभी एक्सप्रेस ट्रेन यहा रूकती है उसी तरह अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन का भी ठहराव कराया जाए। जिससे यात्रियों को सहूलियत मिल सके। विद्यार्थी परिसद के विनय सिंह का कहना है की इस क्षेत्र से सैकड़ों लोग पढ़ाई के लिए कोटा आते जाते जाते है ट्रेन के न रुकने से काफी समस्या होती है। इसमें खासकर छात्राएं ज्यादा परेशान होती हैं। शिक्षक उमेश गुप्ता कहना है कि इस क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लोग इसी स्टेशन पर निर्भर हैं। यहां से सूरत ,रतलाम ,कोटा जाने वाली ट्रेन नहीं मिलती। क्षेत्रीय लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। ट्रेन के न रुकने से रुकने से क्षेत्र के व्यवसाय व विकास पर काफी असर पड़ रहा है। बताते चले की सीमावर्ती कस्बा होने के कारण यहा अनेक सुरक्षा एजेंसिया तैनात है जो अलग अलग राज्यो से आते जाते है ।
बहरहाल कस्बे के बुद्धजीवियों का कहना है इससे प्रसाशन अनभिज्ञ नहीं है।


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