मेराज़ मुस्तफा
इटवा-सिद्धार्थनगर:- एक तरफ जहां सरकार व प्रशासन द्वारा अतिक्रमणकारियों पर सख्त रुख अपना रही वहीं जनपद सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील क्षेत्र अंतर्गत बढ़या चौराहे पर अतिक्रमण के कारण जाम की स्थित देखकर यही लगता है कि सड़क की पटरियों पर कब्जा करने वालों पर सरकार के इस फरमान का कोई असर नही पड़ रहा।इटवा-बेलवा मार्ग के मध्य में पड़ने वाले हर कस्बे में पटरियों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है मगर सर्वाधिक विकट स्थिति खड़सरी व बढ़या चौराहे की है जहां सड़क की पटरियां मौके पर दिखाई ही नही दे रहीं।
इस सम्बंध में बढ़या निवासी शिक्षक व वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद हिंदुस्तानी का कहना है कि सरकार द्वारा जब अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर अवैध कब्जे को अतिक्रमणकारियों से मुक्त करा रही थी तो एक आशा की किरण दिखाई देने लगी थी शायद अब जाम से छुटकारा मिल जाएगा परन्तु परिणाम वही ढांक के तीन पांत।अतिक्रमणकारियों द्वारा पटरियों पर कब्जे की स्थिति यह है कि यदि सामने से कोई चारपहिया वाहन आ जाए तो साईड देना किसी जानलेवा खतरे की तरह प्रतीत होता है।
क्षेत्र के मोहम्मदनगर निवासी अरशद अहमद व भगवतपुर निवासी कमरूज्जमां खां
का कहना है कि बढ़या चौराहे पर शाम के वक्त लोगों की भीड़ बढ़ने के पश्चात मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से ठप हो जाती है जो जाम का मुख्य कारण बनता है।बढ़या चौराहे के साथ-साथ यही स्थिति कुसम्ही,बेलवा मिठौव चौराहे की भी है जहां से वाहनों का निकलना किसी युद्ध से कम नही लगता।इस सम्बंध में जब उपजिलाधिकारी इटवा त्रिभुवन कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उनका सीयूजी नम्बर कवरेज क्षेत्र से बाहर बताया जा रहा था जिस वजह से वार्ता नही हो सकी।बहरहाल अतिक्रमणकारियों के इस बुलंद हौसलों से यही लग रहा कि शासन-प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के अभियान से शायद उन्हें मुक्त ही रखा गया है।
इटवा-सिद्धार्थनगर:- एक तरफ जहां सरकार व प्रशासन द्वारा अतिक्रमणकारियों पर सख्त रुख अपना रही वहीं जनपद सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील क्षेत्र अंतर्गत बढ़या चौराहे पर अतिक्रमण के कारण जाम की स्थित देखकर यही लगता है कि सड़क की पटरियों पर कब्जा करने वालों पर सरकार के इस फरमान का कोई असर नही पड़ रहा।इटवा-बेलवा मार्ग के मध्य में पड़ने वाले हर कस्बे में पटरियों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है मगर सर्वाधिक विकट स्थिति खड़सरी व बढ़या चौराहे की है जहां सड़क की पटरियां मौके पर दिखाई ही नही दे रहीं।
इस सम्बंध में बढ़या निवासी शिक्षक व वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद हिंदुस्तानी का कहना है कि सरकार द्वारा जब अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर अवैध कब्जे को अतिक्रमणकारियों से मुक्त करा रही थी तो एक आशा की किरण दिखाई देने लगी थी शायद अब जाम से छुटकारा मिल जाएगा परन्तु परिणाम वही ढांक के तीन पांत।अतिक्रमणकारियों द्वारा पटरियों पर कब्जे की स्थिति यह है कि यदि सामने से कोई चारपहिया वाहन आ जाए तो साईड देना किसी जानलेवा खतरे की तरह प्रतीत होता है।
क्षेत्र के मोहम्मदनगर निवासी अरशद अहमद व भगवतपुर निवासी कमरूज्जमां खां
का कहना है कि बढ़या चौराहे पर शाम के वक्त लोगों की भीड़ बढ़ने के पश्चात मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से ठप हो जाती है जो जाम का मुख्य कारण बनता है।बढ़या चौराहे के साथ-साथ यही स्थिति कुसम्ही,बेलवा मिठौव चौराहे की भी है जहां से वाहनों का निकलना किसी युद्ध से कम नही लगता।इस सम्बंध में जब उपजिलाधिकारी इटवा त्रिभुवन कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उनका सीयूजी नम्बर कवरेज क्षेत्र से बाहर बताया जा रहा था जिस वजह से वार्ता नही हो सकी।बहरहाल अतिक्रमणकारियों के इस बुलंद हौसलों से यही लग रहा कि शासन-प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के अभियान से शायद उन्हें मुक्त ही रखा गया है।




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